पशु होना क्या है???मनुष्य और पशु में क्या अंतर है??
प्रश्न,,,??
किसी ने मैसेंजर में पूछा है--पशु होना क्या है???
मनुष्य और पशु में क्या अंतर है???
दोनों बातों के अलग उत्तर हैं,,, शास्त्र कहता है कि पशु में चार चीजें हैं--आहार-निद्रा-भय-मैथुन
यानी वह भोजन करता है,, वह सोता है,, ताकतवर से डरता है कमजोर को डराता है,,मैथुन करता है यानी बच्चे पैदा करता है,,,
अगर मनुष्य यही सब करता है तो वह पशु के ही समान है,, यानी यही पशु होना है,,,मनुष्य एक काम अधिक करता है वह धन भी कमाता है तो वह #धनपशु हुआ,,
अब बात आती है कि मनुष्य और पशु में क्या अंतर है??
तो किस्सा-ए-सुकरात सुनें,, एकबार किसी ने भीड़ में से पूछा--महात्मा #सुकरात मनुष्य क्या है??
सुकरात ने कहा मनुष्य बिना पूंछ का दो पैरों वाला जीव है,, अगले दिन वह व्यक्ति पूंछ काटकर #मुर्गा ले गया और आगे बढ़ाते हुए कहा--महात्मा सुकरात,, फिर तो आपकी परिभाषा के अनुसार यह भी मनुष्य हुआ,, बिना पूंछ वाला दो पैरों का जीव,, उसके बाद जीवनभर सुकरात ने मनुष्य की परिभाषा न की,,,
वेद में एक प्रश्न--मनुर्कस्मात ??इसका उत्तर देते हुए वेद भगवान कहते हैं कि--#मनुर्मननात--यानी जो मननशील है वह मनुष्य है,,,बस यही फर्क है मनुष्य और पशु में,,,
कहीं कहीं नीतिवचन मिलता है कि--विद्याहीन:पशुसमाना--यानी जो विद्या संस्कार से हीन है वह पशु है,,,
देखिए ज्ञान दो तरह का होता है--#स्वाभाविक ज्ञान और #नैमित्तिक ज्ञान,,,पशु पक्षियों में स्वाभाविक ज्ञान होता है,,जैसे एक गाय भैंस का बच्चा दो तीन दिन का हो उसको तालाब में डाल दो तैरकर बाहर आ जायेगा,, यह स्वाभाविक ज्ञान है उसे तैराकी का,, जबकि मनुष्य को सिखाया न जाए तो 80 साल के को भी पानी में डाल दो डूब जाएगा,, ऐसे ही पशु खुद खड़े होना चलना बोलना मने रेंकना #रंभाना आदि खुद सिख जाते हैं,, मनुष्य को सिखाया न जाए तो जीवन भर बोलचाल का ही पता न चले उसे,,
मनुस्मृति का वचन है--#जन्मनाजायते शुद्र: संस्कारात द्विज उच्यते--यानी मनुष्य और पशु में यह मौलिक अंतर है,, पशु पशु ही पैदा होता है पशु ही मरता है,, जबकि क्षुद्र का अर्थ है कि मनुष्य पशु से भी कम स्वाभाविक ज्ञान लेकर पैदा होता है लेकिन शिक्षा और संस्कार उसे द्विज यानी देव बना सकते हैं,,,यही उसका दूसरा जन्म है,, जब वो मनुष्य बनता है,,,
जैसे मनुष्य की ऊपर उठकर देव हो जाने की संभावना है वैसे ही नीचे गिरने लगे तो पशु से भी नीचे जा सकता है,,जैसे पशु बलात्कार नहीं करते मनुष्य करता है,, पशु बीड़ी सिगरेट दारू गांजा आदि नहीं पीते मनुष्य पीता है,,पशु प्लास्टिक रबर कपड़े नहीं जलाते मनुष्य जलाता है, वे तेल फूंककर प्रदूषण नहीं करते मनुष्य करता है,,
अनेक तरीकों से समझाया बताया जा सकता है लेकिन फिर यह पोस्ट न रहकर ग्रन्थ बन जाएगी,, हालांकि बन चुकी है😊😊,,, मनन के लिए इतना काफी है बाकी फिर कभी
ॐ श्री परमात्मने नमः,,,
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