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Showing posts from November, 2025

कांसा वाटी मालिश

कांसा वाटी मालिश पैरों के तलवों पर #कांसे धातु की कटोरी से मालिश करना एक प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है, जिसे कांसा वाटी मालिश कहा जाता है। 🧵👇🏻👇 यह मालिश सिर्फ आराम ही नहीं देती, बल्कि इसके कई गहरे शारीरिक और मानसिक फायदे भी हैं,,,,,, कांसे की धातु, जो तांबे और टिन का मिश्रण होती है, आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह मालिश शरीर के ऊर्जा बिंदुओं (मर्म) को उत्तेजित करती है, जिससे कई लाभ होते हैं। कांसे की कटोरी से मालिश के फायदे ,,,,,,,,,: शरीर की गंदगी (टॉक्सिन) बाहर निकालना: कांसे की धातु में शरीर की गर्मी और विषाक्त पदार्थों (toxins) को खींचने का गुण होता है। जब तलवों पर तेल या घी लगाकर कांसे की कटोरी से मालिश की जाती है, तो कटोरी का निचला हिस्सा धीरे-धीरे काला या भूरा हो जाता है। यह इस बात का संकेत माना जाता है कि कटोरी शरीर से जमी हुई गंदगी को बाहर निकाल रही है।   तनाव और थकान दूर करना:  पैरों के तलवों में हजारों तंत्रिकाएं (nerves) होती हैं। मालिश करने से ये तंत्रिकाएं शांत होती हैं, जिससे पूरे शरीर को गहरा आराम मिलता है। ...

स्वप्नशास्त्र 01

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स्वप्नशास्त्र 01 #रात्रिस्वप्न #स्वप्नशास्त्र   अगर स्वप्न ब्रह्म मुहूर्त सुबह (3 बजे से 5:30 मिनट) तक आते हैं तो वह स्वप्न आने वाले एक महीने में सत्य हो जाता है। बाक़ी के सपने सच होने में विलंब होता है । आज हम आपको जानकारी देंगे, स्वप्न तथा उनसे प्राप्त होने वाले संभावित फल के बारे में:-  1- सांप दिखाई देना-  धन लाभ  2- नदी देखना-  सौभाग्य में वृद्धि 3- नाच-गाना देखना-  अशुभ समाचार मिलने के योग 4- नीलगाय देखना-  भौतिक सुखों की प्राप्ति 5- नेवला देखना-  शत्रुभय से मुक्ति 6- पगड़ी देखना-  मान-सम्मान में वृद्धि 7- पूजा होते हुए देखना- किसी योजना का लाभ मिलना 8- फकीर को देखना-  अत्यधिक शुभ फल 9- गाय का बछड़ा देखना-  कोई अच्छी घटना होना 10- वसंत ऋतु देखना-  सौभाग्य में वृद्धि 11- स्वयं की बहन को देखना-  परिजनों में प्रेम बढऩा 12- बिल्वपत्र देखना-  धन-धान्य में वृद्धि 13- भाई को देखना-  नए मित्र बनना 14- भीख मांगना- धन हानि होना 15- शहद देखना-  जीवन में अनुकूलता 16- स्वयं की मृत्यु देखना-  भ...

यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे

काया अर्थात, आपके पिंड में ब्रह्मांड का दर्शन आप भी कर सकते है।  ऋषि मुनि इस विद्या से ब्रह्मांड का दर्शन जिसे यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे कहा जाता है।  यह बहुत ही अमूल्य, एक साबर मंत्रों के गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जी द्वारा दिया गया साबरी ज्ञान है।  (काया अन्दर-पंचवायु दर्शन) पंचवायु के उपप्राण १. नाग = डकार में २. देवदत्त = जिंबाई में ३. कुर्म = पलक झपकने में ४. कृकल = भूख लगती है ५. धनंजय = मृत्यु उपरान्त काया को फुलाता है। स्थूल रूप में जिसमें प्राणों के ढाँचे पर देह का कोश बना हुआ है। सूक्ष्म रूप जिसमें पंच शक्तियाँ प्राणों को चलाती है और कारण रुप जो अनुभव का लक्ष्य है। स्थूल का अधिष्ठान चिग्रंथी है। सूक्ष्म का अधिष्ठान चिदाभास है और कारण का अधिष्ठान चिदाकाश है। चिदग्रंथी में देह का अभिमान रहता है। चिदाभास में लिंग शरीर का ज्ञाता बसता है। चिदाकाश में स्वरूप का साक्षी चैतन्य निवास कर्ता है। १. चिदग्रंथी – यह प्रतिबिम्ब जैसे चमकते हुए धातु के टुकड़ों में मुख को देखे, तो जो जैसे टुकड़ों का रंग है। वैसे ही प्रतिबिंब है। २. चिदाभास – यह प्रतिबिम्ब जैसे जल में मुख देखते है, जो...

आपको “चौकी (पैसा) बाँधने का मंत्र” की सही, विस्तृत, सरल और सुरक्षित जानकारी दी जा रही है।

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आपको “चौकी (पैसा) बाँधने का मंत्र” की सही, विस्तृत, सरल और सुरक्षित जानकारी दी जा रही है। ⚠️ ध्यान दें: यह एक तांत्रिक/शाबर परंपरा का प्रयोग है। इसका भावार्थ समझना आवश्यक है। किसी भी प्रकार के हानि-पूर्ति, किसी का नुकसान, या गलत लाभ हेतु प्रयोग शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता। ✅ चौकी (पैसा) बाँधने का मंत्र — विस्तृत जानकारी ॥ चौकी (पैसा) बाँधने का मंत्र ॥ काली-पीली कंकड़ी, हनुमान की खोपड़ी, नारसिंह का कड़ा। जहाँ से मिलूँ, वहाँ से हाथ जोड़कर हाजिर खड़ा। कच्ची-पक्की दो लकड़ी बनाईं, कच्ची-पक्की लकड़ी बना के क्या करे? कच्चे-पक्के दो कोले बनाए, कोले बना के क्या करे? मसान की चौकी बनाए। अजधर बाँधों, बजन्धर बाँधों। चिपक जा पैसा, दोहाई गुरु गोरखनाथ की आना॥ 🔱 1. यह मंत्र क्या है? यह एक शाबर तांत्रिक प्रयोग है, जिसका उद्देश्य होता है— धन का रुकना खर्च में कमी घर/दुकान में पैसों का स्थिर होना आर्थिक पक्ष की रक्षा जगह की सुरक्षा (तांत्रिक दृष्टि से) इसे “चौकी बाँधना” इसलिए कहते हैं क्योंकि यह ऊर्जा की चौकी स्थापित करता है—जहाँ से नकारात्मकता या धन हानि अंदर नहीं आ सके। 🔱 2. मंत्र का भावा...

जनेऊ क्यों पहनते हैं?

जनेऊ क्यों पहनते हैं?????     ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेयर्त्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥  जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं। जनेऊ धारण करने की परम्परा बहुत ही प्राचीन है। वेदों में जनेऊ धारण करने की हिदायत दी गई है। इसे उपनयन संस्कार कहते हैं। 'उपनयन' का अर्थ है, 'पास या सन्निकट ले जाना।' किसके पास? ब्रह्म (ईश्वर) और ज्ञान के पास ले जाना। हिन्दू धर्म के 24 संस्कारों में से एक 'उपनयन संस्कार' के अंतर्गत ही जनेऊ पहनी जाती है जिसे 'यज्ञोपवीत संस्कार' भी कहा जाता है। मुंडन और पवित्र जल में स्नान भी इस संस्कार के अंग होते हैं। यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। एक बार जनेऊ धारण करने के बाद मनुष्य इसे उतार नहीं सकता। मैला होने पर उतारने के बाद तुरंत ही दूसरा जनेऊ धारण करना पड़ता है। आओ जानते हैं जनेऊ के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के साथ ही उसके स्वास्थ लाभ के बारे में। कौन कर सकता है जनेऊ धारण????? हिन्दू धर्म में प्रत...

श्रीरामचरितमानस सिद्धमन्त्र

#श्रीरामचरितमानस_सिद्धमन्त्र!!          मानस के दोहे चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि 10 बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये।  फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र जप की आवश्यकता हो उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये।       ~अष्टांग हवन सामग्री~    1- चन्दन का बुरादा  2- कालेतिल  3- शुद्धघी  4- बूरा या चीनी  5- अगर  6- तगर, 7- कपूर 8- शुद्धकेसर 9-नागरमोथा  10- पञ्चमेवा,11- जौ और 12- चावल।            ~जानने की बातें~ यह हवन केवल एक दिन करना है। जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) 108 बार हवन करना चाहिये।  मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आ...

भगवान की पूजा का सबसे सुन्दर साधन पुष्प

*भगवान की पूजा का सबसे सुन्दर साधन पुष्प!!!*      भगवान की पूजा में पुष्पों का क्या महत्व है और पुष्पार्चन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए व कैसे फूल भगवान को नहीं चढ़ाने चाहिए ? पुष्प किसे कहते हैं ? जिससे पुण्य की वृद्धि, पापों का नाश व प्रचुर मात्रा में उत्तम फलों की प्राप्ति होती है, उसे ‘पुष्प’ कहा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि—‘देवस्य मस्तकं कुर्यात् कुसुमोपहितं सदा।’ अर्थात् देवता का मस्तक सदैव पुष्प से सजा रहना चाहिए। भगवान को पुष्प चढ़ाने का फल!!!!!      भगवान को सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात आदि चढ़ाने से वे उतना प्रसन्न नहीं होते हैं जितना कि वे एक पुष्प चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं । भगवान की पुष्पों से अर्चना करके राजा नृग, ययाति, नहुष, रघु, भगीरथ और न जाने कितने राजाओं ने चक्रवर्ती साम्राज्य प्राप्त किया और अनेकों को यक्ष, विद्याधर, गंधर्व व देवता के पद की प्राप्ति हुई । फूलों की तुलना में माला चढ़ाने से दुगुना फल मिलता है । भगवान को पुष्प चढ़ाने से होती है इन कामनाओं की पूर्ति— दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी की वृद्धि होती है । अखण्ड ...

दूध के विषय में आयुर्वेद क्या कहता है?

दूध के विषय में आयुर्वेद क्या कहता है??    यह प्रसंग आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ #योगरत्नाकर के अध्याय नंबर एक से लिया गया है।इस अध्याय का नाम है मौलिक सिद्धांत!! इसमें ग्रंथ के रचनाकार दूध के विषय में लिखते हैं। जिस व्यक्ति की भूख अच्छी हो, या जो व्यक्ति दुबला हो, या कोई बालक हो वृद्धि हो। जिसकी मिथुन में अत्यधिक रुचि रहती हो। ऐसे लोगों के लिए दूध हितकर होता है।दूध को तुम शुक्र को बढ़ाने वाला जानों  🚩आगे ग्रंथकार लिखते हैं--  बुखार शरीर में रम गया हो। फेफड़े कमजोर हो गए हो। बार-बार एलर्जी की समस्या होती हो। ऐसी स्थिति में देसी गाय का दूध सर्वोत्तम है। भारतीय देसी गाय का दूध बल को बढ़ाने वाला और जीवनी शक्ति को बढ़ाने वाला है। यह बात और पित्त जो बढ़ जाते हैं उनको कम करता है। 🚩आगे ग्रंथ के रचनाकार लिखते हैं-- 🧿देसी काली गाय का दूध अन्य गायों की अपेक्षा श्रेष्ठ होता है। क्योंकि  यह बात पित्त और कफ तीनों को संतुलित रखने में सर्वोत्तम है। 🌟हल्का पीलापन ली हुई  गाय का दूध वात और पित्त को ठीक करता है। 🌹लाल रंग की गाय का दूध विशेष रूप से वात नाशक है। यह वात रोग...

64 योगिनियों के नाम और उनके कार्य

64 योगिनियों के नाम और उनके कार्य  .......   64 योगिनियां तांत्रिक परंपरा में शक्ति की विभिन्न रूपों की देवी मानी जाती हैं ...योगिनियां विशेष रूप से भारत के हीरापुर, रानीपुर-झरियाल, और खजुराहो जैसे मंदिरों में पूजी जाती हैं ...  योगिनियां देवी शक्ति के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और इनमें अलौकिक शक्तियां होती हैं, जैसे प्रकृति पर नियंत्रण, परिवर्तन, और रक्षा ... 1-16 (प्रथम समूह)   1. माया योगिनी – माया और भ्रम की देवी   2. तारिणी योगिनी – सुरक्षा और मार्गदर्शन करने वाली   3. वायु योगिनी – वायु और हवा पर नियंत्रण   4. मार्जरी योगिनी – फुर्ती और चपलता   5. चार्चिका योगिनी – योद्धा देवी 6. कौमारी योगिनी – ज्ञान और युवा शक्ति   7. भैरवी योगिनी – उग्र और भयावह शक्ति   8. छिन्नमस्ता योगिनी – आत्म-बलिदान और कुंडलिनी शक्ति   9. ज्वाला योगिनी – अग्नि तत्व की देवी   10. विकटा योगिनी – विकराल रूप वाली देवी   11. शंखरी योगिनी – शंख से संबंधित देवी   12. कपालिनी य...

मृत्यु और गर्भ के बीच की संपूर्ण जानकारी

आपका विषय – "मृत्यु और गर्भ के बीच की संपूर्ण जानकारी" – अत्यंत गूढ़, रहस्यपूर्ण और व्यापक है। इसमें आत्मा, कर्म, मृत्यु के बाद की स्थिति, प्रेतावस्था, पितृलोक, पुनर्जन्म, गर्भाधान की प्रक्रिया, गर्भस्थ जीव की स्थिति, और पुनः जन्म तक की यात्रा शामिल है। यह विषय वेद, उपनिषद, गरुड़ पुराण, गर्भोपनिषद, योगवाशिष्ठ, तिब्बती बौद्ध धर्म, जैन और सूफी परंपरा जैसे ग्रंथों में वर्णित है। मैं इसे विस्तृत खंडों में प्रस्तुत करूंगा, ताकि यह 30,000 से अधिक शब्दों का व्यवस्थित, गहन और उपयोगी दस्तावेज़ बन सके। 🔷 शीर्षक: "जीव की मृत्यु से गर्भ तक की आत्मिक यात्रा" (30,000+ शब्दों का विस्तृत ग्रंथ – भाग 1 प्रस्तुत है) ✳️ प्रस्तावना (शब्द: ~800) मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नवीन यात्रा की शुरुआत है। भारतीय परंपरा में आत्मा अमर मानी गई है। शरीर एक वस्त्र की भांति है जिसे आत्मा त्याग कर नया धारण करती है। इस यात्रा में आत्मा को अनेक अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है — मृत्यु की अनुभूति, सूक्ष्म शरीर में प्रवेश, कर्मों के अनुसार प्रेतावस्था या पितृलोक गमन, और अंततः पुनः गर्भ में प्...