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Showing posts from July, 2022

हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी थी ?

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*#हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी थी ?*🔯🕉️ #जानिए हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी रही होगी उसका अंदाजा आप लगा सकते हैं की रात्रि को 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक #लक्ष्मण जी एवं #मेघनाद का युद्ध हुआ था। मेघनाद द्वारा चलाए गए बाण से#लक्ष्मण जी को शक्ति लगी थी लगभग रात को 12:00 बजे के करीब और वो #मूर्छित हो गए थे। #रामजी को लक्ष्मण जी मूर्छा की जानकारी मिलना फिर दुखी होने के बाद चर्चा जे उपरांत हनुमान जी & विभीषणजी के कहने से #सुषेण वैद्य को #लंका से लेकर आए होंगे 1 घंटे में अर्थात 1:00 बजे के करीबन। सुषेण वैद्य ने जांच करके बताया होगा कि #हिमालय के पास #द्रोणागिरी पर्वत🏔️🏔️ पर यह चार #औषधियां🏕️🏕️ मिलेगी जिन्हें उन्हें #सूर्योदय से पूर्व 5:00 बजे से पहले लेकर आना था ।इसके लिए #रात्रि को 1:30 बजे हनुमान जी हिमालय के लिए रवाना हुए होंगे। हनुमानजी को ढाई हजार किलोमीटर दूर हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से उस औषधि को लेकर आने के लिए 3:30 घंटे का समय मिला था। इसमें भी उनका आधे घंटे का समय औषधि खोजने में लगा होगा ।आधे घंटे का समय #कालनेमि नामक राक्षस ने जो उनको भ्रमित किया उसमें लगा होगा एवं...

दंडवत प्रणाम; पुरुष व महिलाओं के लिए

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दंडवत प्रणाम; पुरुष व महिलाओं के लिए                   इस चित्र को एक बार गौर से देखिए  भारतीय महिलाएं दंडवत प्रणाम क्यों नहीं करती हैं... ये है भगवान को प्रणाम करने का सही तरीका...  आपने कभी ये देखा है कि कई लोग मूर्ति के सामने लेट कर माथा टेकते है। जी हां इसी को साष्टांग दंडवत प्रणाम कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस प्रणाम में व्यक्ति का हर एक अंग जमीन को स्पर्श करता है। जो कि माना जाता है कि व्यक्ति अपना अहंकार छोड़ चुका है। इस आसन के जरिए आप ईश्वर को यह बताते हैं कि आप उसे मदद के लिए पुकार रहे हैं। यह आसन आपको ईश्वर की शरण में ले जाता है। लेकिन आपने यह कभी ध्यान दिया है कि महिलाएं इस प्रणाम को क्यों नहीं करती है। इस बारें में शास्त्र में बताया गया है। जानिए क्या..  शास्त्रों के अनुसार स्त्री का गर्भ और उसके वक्ष कभी जमीन से स्पर्श नहीं होने चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका गर्भ एक जीवन को सहेजकर रखता है और वक्ष उस जीवन को पोषण देते हैं। इसलिए यह प्रणाम को स्त्रियां नहीं कर सकती है। जो करती भी है उ...

वृक्षारोपण के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां

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*वृक्षारोपण के विषय में महत्वपूर्ण* *जानकारियां*       *पुराणों व हिन्दू धर्मग्रंथों में उल्लेखित पर्यावरण ज्ञान*  ★ 10 कुॅंओं के बराबर एक बावड़ी,  10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब,  10 तालाब के बराबर 1 पुत्र एवं  10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष है। ( मत्स्य पुराण ) ★ जीवन में लगाये गये वृक्ष अगले जन्म में संतान के रूप में प्राप्त होते हैं। (विष्णु धर्मसूत्र 19/4) ★ जो व्यक्ति पीपल अथवा नीम अथवा बरगद का एक, चिंचिड़ी (इमली) के 10, कपित्थ अथवा बिल्व अथवा ऑंवले के तीन और आम के पांच पेड़ लगाता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है। ( भविष्य पुराण) ★ पौधारोपण करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ★ शास्त्रों के अनुसार पीपल का पेड़ लगाने से संतान लाभ होता है। ★ अशोक वृक्ष लगाने से शोक नहीं होता है। ★ पाकड़ का वृक्ष लगाने से उत्तम ज्ञान प्राप्त होता है। ★ बिल्वपत्र का वृक्ष लगाने से व्यक्ति दीर्घायु होता है। ★ वट वृक्ष लगाने से मोक्ष मिलता है। ★ आम वृक्ष लगाने से कामना सिद्ध होती है। ★ कदम्ब का वृक्षारोपण करने से विपुल लक्ष्मी की प्राप्...

पलाश,पीपल,और वटवृक्ष,ये तीनों ही ब्रह्मा, विष्णु,महेश हैं

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*पलाश,पीपल,और वटवृक्ष,ये तीनों ही ब्रह्मा, विष्णु,महेश हैं।*   ***********************   *पद्मपुराण के उत्तरखण्ड के 115 वें अध्याय के 21 वें 22 वें और 23 वें श्लोक में वटवृक्ष अर्थात बरगद की, और अश्वत्थ अर्थात पीपल की तथा पलाश की महिमा बताते हुए उनके पूजन का विधान बताने वाले  सूत जी से ऋषियों ने कहा कि -*   *कथं त्वयाश्वत्थवटौ गोब्राह्मणसमौ कृतौ।*   *सर्वेभ्योsपि तरुभ्यस्तौ कस्मात् पूज्यतरौ कृतौ।।21।।*   *अष्टादशपुराणप्रवक्ता* श्रीसूत जी से शौनकादिक ऋषियो ने आदरपूर्वक प्रश्न पूंछा कि - हे सूत जी! अभी अभी आपने अश्वत्थ अर्थात पीपल के वृक्ष को तथा वटवृक्ष को गौ और ब्राह्मण के समान ही पूज्य और श्रेष्ठ बताया है।  *कथं त्वयाश्वत्थवटौ गोब्राह्मणसमौ कृतौ।*   *आपने अश्वत्थ अर्थात पीपल और वटवृक्ष अर्थात बरगद को, गौ और ब्राह्मण के समान ही श्रेष्ठ और पूजा के योग्य किस कारण से बताया है?*   *सर्वेभ्योsपि तरुभ्यस्तौ कस्मात् पूज्यतरौ कृतौ।*   *अश्वत्थ और वटवृक्ष* भी तो सभी वृक्षों के समान ही हैं। सभी व...