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इससे यह तय होता था कि बहू कितनी होशियार हैं

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इसे गाँव में ज्यादा छोटी हो तो डलिया, दउरी, बड़ा हो तो उसे दउरा कहा जाता है, यह ग्रामीण संस्कृति का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहले समय में लड़किया इसे शादी से पहले खूब बनाती थी यहीं नहीं बहुत कुछ अपने हाथों से बना कर रखती थीं जिसे उन्हें शादी में ससुराल में उपहार स्वरुप भेजा जाता था और इससे यह तय होता था कि बहू कितनी होशियार हैं, बिज़ने, आसन, खिलौने, टोकरे और भी बहुत सी चीजे

हवन कुंड और हवन के नियमों के बारे में विशेष जानकारी

🔥🔥🔥 हवन 🔥🔥🔥 हवन कुंड और हवन के नियमों के बारे में विशेष जानकारी  〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ जन्म से मृत्युपर्यन्त सोलह संस्कार या कोई शुभ धर्म कृत्य यज्ञ अग्निहोत्र के बिना अधूरा माना जाता है। वैज्ञानिक तथ्यानुसार जहाॅ हवन होता है, उस स्थान के आस-पास रोग उत्पन्न करने वाले कीटाणु शीघ्र नष्ट हो जाते है। शास्त्रों में अग्नि देव को जगत के कल्याण का माध्यम माना गया है जो कि हमारे द्वारा दी गयी होम आहुतियों को देवी देवताओं तक पहुंचाते है। जिससे देवगण तृप्त होकर कर्ता की कार्यसिद्धि करते है। इसलिये पुराणों में कहा गया है।  ""अग्निर्वे देवानां दूतं "" कोई भी मन्त्र जाप की पूर्णता , प्रत्येक संस्कार , पूजन अनुष्ठान आदि समस्त दैवीय कर्म , हवन के बिना अधूरा रहता है। हवन दो प्रकार के होते हैं वैदिक तथा तांत्रिक. आप  हवन वैदिक करायें या तांत्रिक दोनों प्रकार के हवनों को कराने के लिए हवन कुंड की वेदी और भूमि का निर्माण करना अनिवार्य होता हैं. शास्त्रों के अनुसार वेदी और कुंड हवन के द्वारा निमंत्रित देवी देवताओं की तथा कुंड की सज्जा की रक्षा करते हैं. इसलिए इसे “मंडल...