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संस्कृत

#Sanskrit  🌑🌒🌓🌔🌕 संस्कृत को सोधित (शुद्ध) जनकों (लोगों) ने सभी भाषाओं का पिता कहा है। संस्कृत के जो गुण हैं, उनका कोई ठिकाना नहीं है। वेद जो संस्कृत में लिखे गए हैं, उन्हें अब के पंडित भी नहीं समझ पाते। एक ही सूत्र के कई अर्थ होते हैं और हर कोई अपनी-अपनी समझ के अनुसार उसका अर्थ बताता है। जो लोग अर्थ का गहरा मतलब नहीं जानते, वे अपनी बुद्धि के अनुसार उसका अर्थ लगाते हैं। जो ब्रह्मज्ञानी हैं, वे गूढ़ अर्थ को जानते हैं। संस्कृत के वर्णों को देखो और अन्य भाषाओं की युक्तियों को देखो। सबसे पहले संस्कृत का वर्णमाला आया था, उसके बाद अन्य भाषाओं का वर्णमाला आया। आदि के अक्षर बारह स्वर हैं। इन बारह स्वरों को ब्रह्म का रूप मानो। अ, आ, इ, ई,उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः ये सभी बारह ब्रह्म हैं जो ब्रह्मांड में व्याप्त हैं। एक अकार से बारह स्वर बने हैं और ये सभी व्यंजनों के पिता हैं।  जब निर्गुणता सगुणता में बदली, तब उसे जग ने 'क' ककार कहा। जब 'अ' आकार ने अपना स्वरूप धारण किया, तो 'क' ककार दसवें स्थान पर दर्शाया गया। पुत्र, पौत्र सहित थान कर  'क', 'ख', 'ग...

नाग कन्या , मत्स्य कन्या ये सब वास्तव में होती थीं

प्रश्न- भैया नाग कन्या , मत्स्य कन्या ये सब वास्तव में होती थीं या कहानियों में बस?? उत्तर:- *आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी* :- नागों के विषय में पहले एक लेख भी डाला था कि नाग किसे कहते हैं , वह कहाँ रहते हैं आदि आदि । एक याद होगा तो एक लेख था जिसमें मैंने बताया था कि ब्रह्मरेता महापुरुष प्रजनन कैसे करते हैं ।  जिसमें हनुमान जी , सूर्य पुत्र कर्ण , मेघनाद की पत्नी सुलोचना जो नाग कन्या थी उसके विषय में बताया था । तो हाँ यह नाग कन्या , मत्स्य कन्या इत्यादि वास्तव में होती थी । यह मात्रा natural genetic selection था ।। मनुष्य के ही गुण सूत्रों में नाग , वानर , मत्स्य , रीछ इत्यादि के कुछ अंश गुणसूत्रों के वह मिल जाते हैं मनुष्यों के गुण सूत्र से । जैसे मनुष्य के 23 pairs of chromosomes होते हैं ।  तो उनमें 4 pair या 2 pair या 5 pair या 10 pair इन सब प्रजातियों के मिल जाते हैं जिन्हें हम नाग कन्या , मत्स्य कन्या , मत्स्य पुत्र , रीछ पुत्री जाम्बवन्ती आदि कहते हैं । यह देखने में बिल्कुल मनुष्य ही लगेंगे लेकिन इनके गुण मछली , पशु , पक्षी , नाग , बन्दर , इत्यादि के ही लगेंगे । मतल...