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पुरुषोत्तम, मल अथवा अधिक मास

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"पुरुषोत्तम, मल अथवा अधिक मास : शास्त्रीय एवं गणितीय अध्ययन भारतीय पंचाङ्ग, खगोलीय गणना तथा धार्मिक महत्त्व के आलोक में" ✓•प्रस्तावना: भारतीय कालगणना-पद्धति विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक समय-निर्धारण प्रणालियों में से एक है। भारतीय मनीषियों ने केवल दिन, मास और वर्ष की गणना ही नहीं की, अपितु सूर्य, चन्द्र तथा नक्षत्रों की गतियों के समन्वय द्वारा ऐसी अद्भुत पंचाङ्ग व्यवस्था निर्मित की, जो खगोलीय, धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। इसी पंचाङ्ग व्यवस्था का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अंग है — अधिक मास, जिसे शास्त्रों में मलमास तथा पुरुषोत्तम मास भी कहा गया है। अधिक मास और ग्रहों की गति अधिक मास और ग्रहों की गति का संबंध हिंदू पंचांग की एक विशेषता है। यह अतिरिक्त महीना सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए आता है। क्यों आता है अधिक मास? - एक सौर वर्ष में लगभग 365 दिन होते हैं। - एक चंद्र वर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं। - इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 3 साल में लगभग 32-33 दिनों का एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास...