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Showing posts from June, 2026

यक्षों की उत्पत्ति

पुराणों के अनुसार, यक्षों की उत्पत्ति राक्षसों के साथ स्वयं परमपिता ब्रह्मा से हुई थी।  जब ब्रह्मा जी ने जल की उत्पत्ति की तो उसकी रक्षा के लिए कुछ प्राणियों का निर्माण किया। उनमें से ही पहले थे यक्ष एवं राक्षस।  जब ब्रह्मा जी ने पूछा कि इस जल की रक्षा कौन करेगा तो हेति और प्रहेति नामक दो प्राणियों ने उसकी रक्षा का प्रण लिया और इसीलिए वे राक्षस कहलाये। ब्रह्मा जी से ही उत्पन्न एक अन्य जाति ने उस जल के यक्षण, अर्थात पूजा और वृद्धि का प्रण लिया और वे यक्ष कहलाये। हालाँकि प्रथम यक्ष कौन था इसके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिलती। कुछ लोग कुबेर को प्रथम यक्ष मानते हैं किन्तु उनका जन्म बहुत बाद में हुआ। आगे चल कर इन्ही यक्षों की शक्तियां यक्षिणियां कहलाईं। आगे चल कर जब कुबेर यक्षों के राजा और दिग्पाल बनें तो ये सभी यक्षिणियां उनकी अनुचरी बनी। आज भी यक्षिणियों को कुबेर की द्वारपाल के रूप में चित्रित किया जाता है। ये भगवान रूद्र की सेविकाएं भी हैं। ऐसी मान्यता है कि यक्षिणियों का निवास पृथ्वी पर और पृथ्वी के निकट के लोकों में ही होता है और वे इस पृथ्वी की सभी सम्पदाओं की रक्षा करती ...

श्री केदारनाथ मंदिर

बहुत से लोग सोचते हैँ की आजकल लोग श्री केदारनाथ मंदिर के दर्शन हेतु क्यूँ लालायित रहते हैँ.... तो ये रहा उत्तर..... 👇👇👇👇 DRDO के रिसर्च और रात मे शिवलिंग से निकलती नीली रौशनी का रहस्य.... 1. 2013 की आपदा: जब केदारनाथ डूबा, पर शिवलिंग नहीं हिला..... 16 जून 2013। केदारनाथ में बादल फटा। मंदाकिनी में सुनामी आई। 10,000 लोग मरे। पूरा केदारनाथ शहर बह गया।  पर चमत्कार देखो - केदारनाथ मंदिर को खरोंच तक नहीं आई। 1000 साल पुराना मंदिर, 400 किमी/घंटा की रफ्तार से आए पत्थरों के सैलाब के बीच खड़ा रहा।  क्यों?  क्योंकि मंदिर के ठीक पीछे एक विशाल शिला आकर अटक गई थी। 20 फीट ऊँची, 60 फीट चौड़ी। उसने मंदिर को ढाल की तरह बचा लिया।  वैज्ञानिक बोले - "संयोग है।"   भक्त बोले - "नहीं, भीम शिला है। महादेव ने भेजी थी।" पर असली रहस्य तो आपदा के 10 साल बाद खुला। 2023 में। 2. DRDO की रिसर्च: जब शिवलिंग से रेडिएशन निकला 2023, मई। चारधाम यात्रा शुरू हुई। DRDO और ISRO की टीम केदारनाथ में "हिमालयन एनर्जी स्टडी" कर रही थी। मंदिर के अंदर Geiger Counter ले गए - रेडिएशन नापने के लिए। गर्भ...

एक सदाशिव है तो एक शिव है। एक महाविष्णु है तो एक विष्णु है। एक ब्रह्म है तो एक ब्रह्मा है।

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√•विष्णु के अतिरिक्त और कोई सत्ता नहीं है अष्टाविंशद्वय= २८ नक्षत्रों से युक्त नीलवर्ण आकाश का विष्णु  तामसरूप है। यह देखा जाता दिखायी पड़ता तथा इससे इसके आलोक में पार्थिव वस्तुएँ देखी जाती हैं। इससे यह पशु है। वृक्ष, लता, गुल्म, वीरुध, तृण तथा गिरि-यह ६ भेदों वाला मुख्य (उद्भिद) रूप भी विष्णु का है। खन् + अच् + यत्= मुख्य भूमि को खन कर/ चीर कर निकला हुआ प्राणी/वनस्पति समुदाय मुख्य वा उद्भिद है। विष्णु के इन नाना रूपों को नमस्कार कर मैं श्री महाराज जी के सम्मुख भक्तिभाव से नत होता हूँ। √• एक सदाशिव है तो एक शिव है। एक महाविष्णु है तो एक विष्णु है। एक ब्रह्म है तो एक ब्रह्मा है। सदाशिव, महाविष्णु एवं ब्रह्म का वर्णन करना किसी के लिये भी शक्य नहीं है। जो पुरुष स्त्री के साथ ऊंचे स्थान एकान्त में अपरिग्रह वृत्ति से रहता हुआ पत्नी को ज्ञान कथा सुनाता, समाधि लगाता ऐसा पुरुष शिव है। उसे प्रणाम । जो पुरुष द्वीप द्वीपान्तर में सबसे दूर समुद्र से घिरे व दुर्गम स्थान में पत्नी सहित रहते हुए योगनिद्रा में लीन रहता तथा समस्त जगत् के कल्याण का उपक्रम करता, वह विष्णु है। उसे मेरा सादर प्रणाम । जो...

ब्रह्मा जी का एक दिन हमारी पृथ्वी के कितने वर्षों के बराबर होता है।

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हिन्दू धर्म में चतुर्युगी व्यवस्था है जिनमे चार युग होते हैं - सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। हिन्दू धर्म की काल गणना हमारे ग्रंथों की सबसे रोचक जानकारियों में से एक है। इसके विषय में जितना भी जाना जाये वो कम है। इसके अतिरिक्त आश्चर्यजनक रूप से हमारी सहस्त्रों वर्षों पुरानी गणना वैज्ञानिक रूप से बिलकुल सटीक बैठती है। आइये इस महत्वपूर्ण विषय को जानते हैं। 6 श्वास से एक विनाड़ी बनती है। 10 विनाडियों से एक नाड़ी बनती है। 60 नाड़ियों से एक दिवस (दिन और रात्रि) बनते हैं। 30 दिवसों से एक मास (महीना) बनता है। 6 मास का एक अयन होता है।  2 अयन का एक मानव वर्ष (मनुष्यों का वर्ष) होता है।  हिन्दू धर्म के अनुसार 1 मानव वर्ष में 360 दिवस होते हैं। यहाँ 365 वाली गणना नहीं चलती। 15 मानव वर्ष के बराबर पित्तरों का 1 वर्ष होता है जिसे पितृवर्ष कहते है।  360 मानव वर्षों का एक दिव्य वर्ष होता है। दिव्य वर्ष देवताओं के एक वर्ष को कहते हैं। दैत्यों का एक वर्ष भी इतना ही होता है। बस अंतर ये है कि देवताओं का दिन दैत्यों की रात्रि और देवताओं की रात्रि दैत्यों का दिन होती है। ...