अधिक मास एवं क्षय मास की गणना
अधिक मास एवं क्षय मास की गणना प्रश्न: – अधिक मास एवं क्षय मास की गणना कैसे होती है? ये कब-कब आते हैं और इसमें कौन से कर्म त्याज्य हैं और कौन से कर्म किए जा सकते हैं? मास, माह, महीना क्या है? उत्तर:– चांद्र, सौर, सावन, नाक्षत्र ये 4 प्रकार के मास होते हैं। प्रायः ज्योतिष के सिद्धांत ग्रंथों में 9 प्रकार के मासों व वर्ष का विचार मिलता है। किंतु चतुर्भिव्र्यवहारोऽत्र सूर्य सिद्धांत वचन के आधार पर चांद्र, सौर, सावन और नाक्षत्र मास का व्यवहार होता है। सौर मास:– एक राशि का जब सूर्य भोग कर लेता है, तो सौर मास होता है, अर्थात सूर्य की संक्रांति के बाद के संक्रमण के पूर्व संचरण समय तक सूर्य का मास सौर मास कहलाता है। सौर मास मेषादि सौरमासांस्ते भंवति रविसंक्रमात्। मधुश्च माध्वश्चैव शुक्र शुचिरथो नभः।। नभस्यश्चेष उर्जश्च सहश्चाथ सहस्यकः। तपस्तपस्यः क्रमतः सौरमासाः प्रकीर्तिता।। रवि मेषादि 12 राशियों से भ्रमण करता है। इन राशियों में जिस मास रवि की संक्रांति होती हैं उसी को सौर मास कहते हैं। एक वर्ष में 12 सौर मास होते हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं- मधु, माधव,...