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Showing posts from July, 2023

अधिक मास एवं क्षय मास की गणना

अधिक मास एवं क्षय मास की गणना   प्रश्न: – अधिक मास एवं क्षय मास की गणना कैसे होती है? ये कब-कब आते हैं और इसमें कौन से कर्म त्याज्य हैं और कौन से कर्म किए जा सकते हैं? मास, माह, महीना क्या है?  उत्तर:– चांद्र, सौर, सावन, नाक्षत्र ये 4 प्रकार के मास होते हैं। प्रायः ज्योतिष के सिद्धांत ग्रंथों में 9 प्रकार के मासों व वर्ष का विचार मिलता है।  किंतु चतुर्भिव्र्यवहारोऽत्र सूर्य सिद्धांत वचन के आधार पर चांद्र, सौर, सावन और नाक्षत्र मास का व्यवहार होता है।  सौर मास:– एक राशि का जब सूर्य भोग कर लेता है, तो सौर मास होता है, अर्थात सूर्य की संक्रांति के बाद के संक्रमण के पूर्व संचरण समय तक सूर्य का मास सौर मास कहलाता है।  सौर मास मेषादि सौरमासांस्ते भंवति रविसंक्रमात्। मधुश्च माध्वश्चैव शुक्र शुचिरथो नभः।। नभस्यश्चेष उर्जश्च सहश्चाथ सहस्यकः। तपस्तपस्यः क्रमतः सौरमासाः प्रकीर्तिता।।  रवि मेषादि 12 राशियों से भ्रमण करता है। इन राशियों में जिस मास रवि की संक्रांति होती हैं उसी को सौर मास कहते हैं। एक वर्ष में 12 सौर मास होते हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं- मधु, माधव,...

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान) 1 काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग 2 त्रुटि = 1 लव, 1 लव = 1 क्षण 30 क्षण = 1 विपल, 60 विपल = 1 पल 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ), 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा ) 13 होरा = 1 प्रहर व 8 प्रहर 1 दिवस (वार) 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार), 7 दिवस = 1 सप्ताह 4 सप्ताह = 1 माह, 2 माह = 1 ऋतू  6 ऋतू = 1 वर्ष, 100 वर्ष = 1 शताब्दी 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी, 432 सहस्राब्दी = 1 युग 1 युग = 432 सहस्राब्दी 2 युग = 1 द्वापर  3 युग, = 1 त्रैता युग, 4 युग = 1 सतयुग  सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग 72 महायुग = 1 मनवन्तर, 1000 महायुग = 1 कल्प 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ) 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प। (देवों का अन्त और जन्म ) | महालय = 730 कल्प | ( ब्राह्मा का अन्त और जन्म )

आठ पहर चौसठ घड़ी क्या है?

आठ पहर चौसठ घड़ी क्या है? चौबीस(24) घंटे अर्थात् एक दिन के समय के परिमाण का अति प्राचीन मापक /विभाजक इकाई या पैमाना। 24घंटे=8पहर=64 घड़ी। 8×8=64 1 पहर =3 घंटे 1 पहर=8घड़ी

जामवन्त कितने योजन समुद्र लाँघ सकता था?

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जामवन्त कितने योजन समुद्र लाँघ सकता था? अंगद के अगुआई में सीता की खोज के लिए दक्षिण दिशा की ओर निकली हुई वानर सेना जब समुद्र के निकट पहुंची, तब अंगद ने सभी से बारी बारी उनके समुद्र लांघने की क्षमता पूछी। इसके जवाब में किसी वानर ने १०, किसी ने २०, किसी ने ३०, किसी ने ४०, तो किसी ने ८० योजन तक समुद्र लांघने की क्षमता बताई। जब जाम्बवान् की बारी आई, तो उन्होंने ९० योजन समुद्र लांघने की अपनी क्षमता बताई। इसके बाद अंगद ने पूरे १०० योजन की अपनी क्षमता बताई। किन्तु उन्हें अपने वापस लौटने की क्षमता पर संदेह था। किन्तु केवल एक ही वानर में पूरे १०० योजन लांघ कर तथा वापिस लौटने की क्षमता थी। और वो कौन थे, मुझे बतलाने की आवश्यकता नहीं है।

एक योजन में कितने किलोमीटर

एक योजन में कितने किलोमीटर अलग-अलग भारतीय खगोलविदों ने योजन को अलग-अलग आँका है अगर हम बात करें सूर्य सिद्धान्त की तो 1 योजन 8 किमी के बराबर होता है ।किन्तु 14वीं शताब्दी के खगोलविद परमेश्वर ने 1 योजन को 13 किमी के बराबर माना है। महाशय,जिस समय दूरी मापने की इकाई कोस प्रचलित थी उसी समय दूरी मापने की एक दुसरी इकाई योजन भी थी।एक योजन में चार कोस होते थे। वर्तमान में एक कोस लगभग ३.१२ किमी होता है।इस हिसाब से एक योजन में लगभग १२.४८ किमी होंगे। १ योजन कितनी दूरी होती है, यह अलग-अलग भारतीय खगोलविदों ने अलग-अलग दिया है। सूर्य सिद्धान्त में १ योजन को ८ मील के बराबर लिया गया है। इसी तरह आर्यभटीय में भी १ योजन को ८ मील लिया गया है। किन्तु १४वीं शताब्दी के खगोलविद परमेश्वर ने १ योजन को १३ मील के बराबर लिया है। एक योजन कि लम्बाई कितनी होती है? एक योजन की लम्बाई भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद ने ८मील अर्थात 13 किलोमीटर बताई है,जबकी अधिकांश विद्वान 13 से १६ किलोमीटर अर्थात ८ से 10 मील बताई है. योजन तथा किलोमीटर दोनो ही दूरी को मापने के लिए प्रयो...

हनुमान चालीसा में वर्णित है पृथ्वी से सूर्य के बीच की दूरी की नाप

हनुमान चालीसा में  वर्णित है पृथ्वी से सूर्य के बीच की दूरी की नाप 'जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,  लिल्यो ताहि मधुर फल जानू',  हनुमान चालीसा की ये लाइनें तो आपने खूब सुनी होंगी, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी दोहे से सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी छापी हुई है। ऐसे जाने सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी। हम आपको बता दें कि इस श्लोक में 'युग' का मतलब चार युगों कलयुग, द्वापर, त्रेता और सतयुग से है।  कलयुग में 1200 वर्ष,  द्वापर में 2400 वर्ष,  त्रेता में 3600 वर्ष  सतयुग में 4800 वर्ष माने गए हैं, जिनका  कुल योग 12000 वर्ष है। 'सहस्त्र' का मतलब 1000 वर्ष है। 'योजन' का मतलब 8 मील से होता है (1 मील में 1.6 किमी होते हैं)।  जुग (युग) सहस्त्र जोजन (योजन)  = 1 युग ×  1000 योजन = 12000 ×  1000 योजन = 1,20,00,000 योजन अब अगर 1 योजन को युग और सहस्त्र से गुणा कर दिया जाए तो 8 x 1.6 x 12000 x 1000=15,36,00000 (15 करोड़ 36 लाख किमी), जोकि सूर्य से पृथ्वी के बीच की प्रमाणिक दूरी है। क्या है दोहे का अर्थ 'जुग (युग) सहस्त्र जोजन ...

हरिद्वार से बदरीनाथ की यात्रा की दूरी

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  हरिद्वार से बदरीनाथ की यात्रा की दूरी प्रसंग महर्षि वशिष्ठ अपनी भार्या देवि अरुंधती को बदरीकाश्रम का महत्व बताते हुए अवन्ती नगर के चन्द्रगुप्त नामक व्यापारी और बदरीवन में निवास करने वाले धर्मदत्त ब्राह्मण का प्रसंग सुनाते हैं। जिसके अंतर्गत ... चन्द्रगुप्त उवाच:  कुत्र   वै   तन्महाक्षेत्रं    बदरीवनसंज्ञितम् ।  को देवः पूज्यते तत्र लभ्यते किं फलं नरैः ॥13॥                                       (द्विषष्टितमोऽध्यायः) चन्द्रगुप्त ने कहा, " बदरीवन नामक वह महाक्षेत्र कहाँ है ? वहाँ लोग किस देवता की पूजा करते हैं? वहाँ मनुष्यों को क्या फल मिलता है? ब्राह्मण उवाच गंगाद्वारात्पूर्वभागे      त्रिंशयोजनसम्मि । वर्त्तते  तन्महाक्षेत्रं भुक्तिमुक्तिप्रदायकम् || 15 | ब्राह्मण ने कहा- हरिद्वार से पूर्व दिशा में तीस योजन की दूरी पर भुक्तिमुक्तिदायक वह महाक्षेत्र विद्यमान है। नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट मैं गूगल मैप दिया गया है। जिसमें हरिद्वार से...