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Showing posts from September, 2025

ऐसे है यमलोक के यमराज

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 ऐसे है यमलोक के यमराज 〰️〰️🔹〰️〰️🔹〰️〰️ विधाता लिखता है, चित्रगुप्त बांचता है, यमदूत पकड़कर लाते हैं और यमराज दंड देते हैं। मृत्य का समय ही नहीं, स्थान भी निश्चित है। दस दिशाओं में से एक दक्षिण दिशा में यमराजजी बैठे हैं। यमराजजी कौन है जानिए इस संबंध में उनके जीवन का संपूर्ण रहस्य।   सूर्यदेव के पुत्र यमराज के दादा का नाम ऋषि कश्यप और दादी का नाम अदिति था। सूर्यदेव की दो पत्नियां थीं। एक संज्ञा और दूसरी छाया। विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से वैवस्वत मनु, यम, यमी, अश्विनीकुमारद्वय और रेवन्त तथा छाया से शनि, तपती, विष्टि और सावर्णि मनु हुए।   वैवस्वत मनु इस मन्वन्तर के अधिपति हैं। यमराज जीवों के शुभाशुभ कर्मों का फल देते हैं। यमी यमुना नदी की संवरक्षक हैं। अश्विनीकुमारद्वय देवताओं के वैद्य हैं। रेवन्त अपने पिता की सेवा में रहते हैं। शनि को ग्रहों में प्रतिष्ठित कर दिया हैं। तपती का विवाह सोमवंशी राजा संवरण से कर दिया। विष्टि भद्रा नामके नक्षत्र लोक में प्रविष्ट हुई और सावर्णि मनु आठवें मन्वन्तर के अधिपति होंगे।   यमराज की पत्नी का नाम दे‌वी धुमोरना है। कतिला ...

सूतक क्या है?

सूतक क्या है? सन्तान का जन्म होने के पश्चात् जो घर वालों को कुछ दिनों के लिए कर्म धर्म का पालन करना वर्जित होता है। जैसे पूजा करना, अन्य दान करना इत्यादि। इसी को नाम सूतक है। इसे राजस्थान में 'सावड़' कहते हैं। महाराष्ट्र में 'वृद्धि' कहते हैं तथा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि में 'सूतक' नाम से ही जाना जाता है। पातक किसे कहते हैं? जिस तरह जन्म के समय परिवार के सदस्यों पर सूतक लग जाता है उसी तरह परिवार के लिए सदस्य की मृत्यु के बाद सूतक का लग जाता है, जिसे पातक भी कहा जाता है। लेकिन जन्म-मरण दोनों को 'सूतक' शब्द से भी जाना जाता है। गरुण पुराण में सूतक शब्द नहीं प्रयोग करते हुए पातक शब्द का प्रयोग कर दिया गया। तब से लोग सूतक और पातक को अगल अलग मानने लगे। वास्तव में ये दोनों एक है क्योंकि दोनों (जन्म-मरण) में कर्म-धर्म का पालन नहीं किया जाता। गरुण पुराण के अनुसार जब भी परिवार के किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो घर के सदस्यों को पुजारी को बुलाकर गरुण पुराण का पाठ करवाकर पातक के नियमों को समझना चाहिए। गरुण पुराण के अनुसार पातक लगने के १३वें दिन क्रिया...

विलोम विवाह

आपने बहुत गहन और संवेदनशील प्रश्न पूछा है – “विलोम विवाह” (अर्थात उच्च वर्ण–निम्न वर्ण के बीच विवाह) पर। इसे हमारे धर्मशास्त्रों, पुराणों और आचार-ग्रंथों में बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। १. शास्त्रों में विलोम विवाह का स्थान मनुस्मृति (अध्याय ३) इसमें वर्ण संकर (मिश्रण) को विस्तार से बताया गया है। अनुलोम विवाह (उच्च वर्ण पुरुष और निम्न वर्ण स्त्री) को यद्यपि स्वीकार किया गया, पर इसे भी आदर्श नहीं माना। विलोम विवाह (निम्न वर्ण पुरुष और उच्च वर्ण स्त्री) को धर्मविरुद्ध, अपवित्र और समाज में अव्यवस्था फैलाने वाला बताया गया। महाभारत, शांतिपर्व कहा गया है कि जब वर्णव्यवस्था का उल्लंघन होता है, तब वर्णसंकर उत्पन्न होता है और धर्म धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है। पराशर स्मृति अनुलोम विवाह में भी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही अनुमति दी गई, पर विलोम विवाह को पूरी तरह निषिद्ध कहा गया। २. शास्त्रों की दृष्टि से विलोम विवाह क्यों अनुचित माना गया? धार्मिक दृष्टि से स्त्री को ‘कुल की लक्ष्मी’ और ‘वंश की वाहिका’ कहा गया है। यदि वह उच्च वर्ण से निम्न वर्ण म...

सुदर्शन चक्र सबसे बड़ा शस्त्र

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*सुदर्शन चक्र सबसे बड़ा शस्त्र।* सुदर्शन चक्र हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लिखित सबसे शक्तिशाली शस्त्रों में से एक है। पौराणिक कथाओं में, इसे अग्नि देवता द्वारा भगवान विष्णु को दिया गया था। भगवान विष्णु ने इसे अपने अवतार भगवान कृष्ण को सौंप दिया। इसलिए इसे कृष्ण सुदर्शन चक्र भी कहा जाता है। सुदर्शन चक्र हिंदू धर्म के सबसे प्रसिद्ध प्रतीकों में से एक है, जो समय की शक्ति और सृष्टि और विनाश के शाश्वत चक्र का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्मांड के संरक्षक भगवान विष्णु के लिए, सुदर्शन चक्र बुराई को नष्ट करके संतुलन बहाल करने के लिए एक शस्त्र के रूप में कार्य करता है। यही कारण है कि सुदर्शन चक्र यंत्र को भी उनकी मूर्ति के साथ पूजा जाता है। सुदर्शन चक्र को एक घूर्णन डिस्क के रूप में वर्णित किया गया है जिसमें दांतेदार किनारे होते हैं। माना जाता है कि इसमें 108 दांत होते हैं, जो 108 उपनिषदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। डिस्क उच्च वेग पर घूमता है, चलते समय तेज रोशनी और एक तेज आवाज उत्पन्न करता है। जब फेंका जाता है, तो कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र में अपने रास्ते में किसी भी चीज़ को नष्ट करने की शक्ति होत...

महाभारत कथा में कुछ अनसुनी बातें है

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▶️ महाभारत कथा में कुछ अनसुनी बातें है ◀️ 🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨 🔹 वेदव्यास और महाभारत की रचना,एक गौरवशाली इतिहास और रहस्यमयी सत्य, महाभारत का महत्व🔹 📕महाभारत को भारतीय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। यह सिर्फ़ पांडवों और कौरवों की कहानी नहीं, अपितु उस समय के धर्म, युद्ध, राजनीति और सामाजिक जीवन का विस्तृत वर्णन है। कई वैज्ञानिक खोजें बताती हैं कि महाभारत कोई काल्पनिक कथा नहीं, अपितु वास्तविकता से जुड़ा ग्रंथ है। महाभारत काल के कई स्थान, जैसे कुरुक्षेत्र और द्वारका, आज भी मौजूद हैं और पुरातात्विक साक्ष्य इनकी पुष्टि करते हैं।📕 🔹 वेदव्यास और महाभारत की रचना 🔹 🧘महाभारत को श्रीकृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने लिखा, जिन्हें 28वें वेदव्यास के रूप में जाना जाता है। इसे तीन चरणों में लिखा गया🧘 •  पहला चरण: 8,800 श्लोक •  दूसरा चरण: 24,000 श्लोक •  तीसरा चरण: 1 लाख श्लोक यह ग्रंथ पंचम वेद कहलाता है और भारत की राष्ट्रीय गाथा है।  🌷 महाभारत का अनुवाद 🌷 📕महाभारत का अंग्रेजी में दो बार पूर्ण अनुवाद हुआ📕 🚩•  1883-1896: किसारी मोहन गांगुली 🚩• ...

देव, ऋषि और पितृ सम्पूर्ण तर्पण विधि

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▶️ देव, ऋषि और पितृ सम्पूर्ण तर्पण विधि ◀️ 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ ।।ॐ अर्यमा न त्रिप्य्ताम इदं तिलोदकं तस्मै स्वधा नमः। ...ॐ मृत्योर्मा अमृतं गमय।। पितरों में अर्यमा श्रेष्ठ है। अर्यमा पितरों के देव हैं। अर्यमा को प्रणाम। हे! पिता, पितामह, और प्रपितामह। हे! माता, मातामह और प्रमातामह आपको भी बारंबार प्रणाम। आप हमें मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें। क्या है तर्पण 〰️🌸🌸〰️ पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं तथा तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं। श्राद्ध पक्ष का माहात्म्य उत्तर व उत्तर-पूर्व भारत में ज्यादा है। तमिलनाडु में आदि अमावसाई, केरल में करिकडा वावुबली और महाराष्ट्र में इसे पितृ पंधरवडा नाम से जानते हैं। 'हे अग्नि! हमारे श्रेष्ठ सनातन यज्ञ को संपन्न करने वाले पितरों ने जैसे देहांत होने पर श्रेष्ठ ऐश्वर्य वाले स्वर्ग को प्राप्त किया है वैसे ही यज्ञों में इन ऋचाओं का पाठ करते हुए और समस्त साधनों से यज्ञ करते हुए हम भी उसी ऐश्वर्यवान स्वर्ग को प्राप्त करें।...